Sunday, October 19, 2014

आज कुछ ग़जब हुआ
एक कविता चुपके से
दंवे से पाओं से आयी
मेरे कानों के एक दम करीब
अपने गालों को मेरे गालों से
सटाते ही बोली
धीमे से
सुनो आज मुझपर एक कविता लिख दो न
मैं पहले देखती रही उसे
फिर सोचा
कौन से शब्द करूँ इस्तेमाल
जिससे बयां कर सकूँ
एक कविता को कविता मैं!!