आज कुछ ग़जब हुआ
एक कविता चुपके से
दंवे से पाओं से आयी
मेरे कानों के एक दम करीब
अपने गालों को मेरे गालों से
सटाते ही बोली
धीमे से
सुनो आज मुझपर एक कविता लिख दो न
मैं पहले देखती रही उसे
फिर सोचा
कौन से शब्द करूँ इस्तेमाल
जिससे बयां कर सकूँ
एक कविता को कविता मैं!!
एक कविता चुपके से
दंवे से पाओं से आयी
मेरे कानों के एक दम करीब
अपने गालों को मेरे गालों से
सटाते ही बोली
धीमे से
सुनो आज मुझपर एक कविता लिख दो न
मैं पहले देखती रही उसे
फिर सोचा
कौन से शब्द करूँ इस्तेमाल
जिससे बयां कर सकूँ
एक कविता को कविता मैं!!
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