kavita ki kavitayein
Sunday, December 5, 2010
शिकवें नहीं है अब जहाँ न कोई शिकायत है यहाँ,
दो नहीं रहते अब इस जहां में ठहरा है सिर्फ इक निशान,
इश्क तेरा और यादों के काफिलें में ख़ुशी बनी रहती हूँ मेरी जान
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